Friday, September 15, 2017

आइए, आज व्हाट्सएप्प के इमोजी की सहायता से दुनिया की सबसे वैज्ञानिक, सबसे प्रतिष्ठित, सबसे अधिक उपयोगी और निस्संदेह सर्वश्रेष्ठ भाषा *संस्कृत* देवभाषा सीखते हैं..
😀 - हसति -हंसता \ती ,है।
😬 - निन्दति--निंदा करता /करती है।
😭 - रोदिति --रोता/रोती है।
😇 - भ्रमति--घूमता /ती है।
🤔 - चिन्तयति --चिंतन करता/ती है।
😡 - कुप्यति --नाराज होता /ती है।
😴 - स्वपिति --सोता /ती है।
😩 - क्षमां याचते / जृम्भते ---क्षमा मांगता /ती है। जम्हाई लेता/ ती है।
😳 - विस्मयो भवति / निर्निमेषं पश्यति --विस्मित होता/ती है। एकटक, अपलक देखता/ती है।
😌 - ध्यायति --ध्यान करता/ती है।।
👁 - पश्यति --देखता/ती है।
🗣 - वदति --बोलता, कहता /ती है।
- लिखति --लिखता है।
🙏� - प्रणमति --प्रणाम करता है।
👉 - निर्दिशति --निर्देश देता है।
🙌 - आशिषति --आशीर्वाद देताहै।
👃 - जिघ्रति --सूँघता है। 🚶🏻- गच्छति --जाता है।
🏃🏻- धावति --दौड़ता है।। 💃🏻 - नृत्यति --नाचता है।
विमानम् --विमान।।🎁 उपायनम् --उपहार।
🚘 यानम्--वाहन, सवारी।
💺 आसन्दः / आसनम् --आसन ।
नौका--नाव।।🗻 पर्वत:।🚊 रेलयानम् ।
🚌 लोकयानम् --बस।।🚲 द्विचक्रिका --साएकल।
🇮🇳 ध्वज:--झंडा ,पताका।।।🐰 शशक:--खरगोश।।
🐯 व्याघ्रः--बाघ।। 🐵 वानर:--बंदर।।
🐴 अश्व:।🐑 ।मेष:--भेंड़।।🐘 गज:--हाथी।
🐢 कच्छप:--कछुआ। 🐜 पिपीलिका--चींटी।
🐠 मत्स्य:--मछली।।🐄 धेनु:--गाय।
🐃 महिषी-- भैंस। 🐐 अजा--- बकरी।
🐓 कुक्कुट:--म
🐕 श्वा / कुक्कुरः / सारमेयः (श्वा श्वानौ श्वानः) ।
🐁 मूषक:।🐊 मकर:--। 🐪 उष्ट्रः।
🌸 पुष्पम् ।🍃 पर्णे (द्वि.व)। 🌳 वृक्ष:।
🌞 सूर्य:। 🌛 चन्द्र:। तारक: / नक्षत्रम् ।
छत्रम् । 👦 बालक:। 👧 बालिका । 👂 कर्ण:।
👀 नेत्रे (द्वि.व)। 👃नासिका । 👅 जिह्वा । 👄 औष्ठौ (द्वि.व) ।
👋 चपेटिका । 💪 बाहुः । 🙏 नमस्कारः।
👟 पादत्राणम् (पादरक्षक:) ।।👔 युतकम् -
💼 स्यूत:।।👖 ऊरुकम् ।
👓 उपनेत्रम् ।।💎 वज्रम् (रत्नम् ) ।
💿 सान्द्रमुद्रिका ।।🔔 घण्टा ।
🔓 ताल:।।🔑 कुञ्चिका ।
घटी।।💡 विद्युद्दीप:।।🔦 करदीप:।
🔋 विद्युत्कोष:।।🔪 छूरिका ।
अङ्कनी । 📖 पुस्तकम् ।
🏀 कन्दुकम् । 🍷 चषक:। 🍴 चमसौ (द्वि.व)।
📷 चित्रग्राहकम् । 💻 सड़्गणकम् ।
📱जड़्गमदूरवाणी । स्थिरदूरवाणी ।
📢 ध्वनिवर्धकम् । समयसूचकम् ।
हस्तघटी । 🚿 जलसेचकम् ।
🚪द्वारम् । 🔫 भुशुण्डिका ।(बु?) ।
🔩आणिः । 🔨ताडकम् ।
💊 गुलिका/औषधम् । 💰 धनम् ।
पत्रम् । 📬 पत्रपेटिका ।
📃 कर्गजम्/कागदम् । 📊 सूचिपत्रम् ।
📅 दिनदर्शिका । कर्त्तरी ।
📚 पुस्तकाणि । 🎨 वर्णाः ।
🔭 दूरदर्शकम् । 🔬 सूक्ष्मदर्शकम् ।
📰 पत्रिका । 🎼🎶 सड़्गीतम् ।
🏆 पारितोषकम् । पादकन्दुकम् ।
चायम् । 🍵पनीयम्/सूपः ।
🍪 रोटिका ।🍧 पयोहिमः ।
🍯 मधु । 🍎 सेवफलम् ।
🍉कलिड़्ग फलम् । 🍊नारड़्ग फलम् ।
🍋 आम्र फलम् । 🍇 द्राक्षाफलाणि ।
🍌कदली फलम् । 🍅 रक्तफलम् ।
🌋 ज्वालामुखी । 🐭 मूषकः । 🐴 अश्वः । 🐺 गर्दभः ।
🐷 वराहः

Monday, September 11, 2017

मूसा एक जंगल से गुजरते थे और उन्होंने एक आदमी को झुके देखा। साँझ हो गयी थी, सूर्यास्त हो रहा था। वह आदमी गड़रिया था। उसकी भेड़ें भी उसीके पास— पास में—में करती घूम रही थीं और वह उन्हींके बीच में बैठा प्रार्थना में लीन था। आकाश की तरफ हाथ जोड़े हुए थे उसने और बड़ी मस्ती में बातें कर रहा था। मूसा भी ठिठक गये उसके पीछे कि क्या कह रहा है? जो सुना तो मूसा बहुत घबडा गये। यह कोई प्रार्थना है!

वह आदमी कह रहा था कि हे प्रभु, तू बहुत अकेला होगा वहाँ! मुझे पता है कभी—कभी जब रात अकेले होता हूँ, कैसा भय लगता है। तुझे भय नहीं लगता? तुझे भय लगता होगा, मैं आने को राजी हूँ, तू मुझे बुला ले। मैं सदा तेरे साथ रहूँगा, तेरी छाया बन जाऊँगा। और कभी—कभी तु्झे भूख भी लगती होगी और कोई भोजन देनेवाला नहीं होता होगा। मैं तेरा भोजन भी बना दूँगा, मुझे भोजन बनाना भी आता है। और मैं तुझे खूब नहलाऊँगा, धुलाऊँगा पता नहीं किसीने तुझे नहलाया—धुंलाया कि नहीं; जूँ पड़ गयी होंगी——मेरी भेड़ों में पड़ जाती हैं। मगर देख लो मेरी भेड़ों को, एक—एक की सफाई कर देता हूं। रात तेरे पैर भी दबा दूँगा, थक जाता होगा ——इतना विराट तेरा विस्तार है, इसका निरीक्षण करते—करते थक जाता होगा, रात तेरे पैर भी दबा दूँगा। तेरे कपड़े भी धो दूँगा। तू जो कहेगा सब कर दूँगा, तू मुझे उठा ले, तू मुझे बुला ले।

मूसा के बर्दाश्त के बाहर हो गया जब उसने कहा तेरी जूँ भी बीन दूँगा। मूसा ने कहा——ठहर नासमझ! यह प्रार्थना कैसी प्रार्थना? बहुत प्रार्थनाएँ मैने सुनी, यह तूने किससे सीखी, कहाँ से सीखी? वह तो घबड़ा गया, सीधा—सादा आदमी, उसने कहां——मुझे क्षमा करो, मुझे कुछ पता नहीं, सीखी नहीं, खुद ही बना ली है। यह तो आप जानते ही हैं कि मैं तो गड़रिया हूँ, पढ़ा—लिखा नहीं हूँ, शास्त्र की मुझे क्या तमीज, संस्कार जैसी चीज मुझपर कोई पड़ी नहीं है, खुद ही बना ली है। अब भेड़ों से बात करता हूँ, उतनी ही मेरी भाषा है। उसी भाषा को परिमार्जित करके परमात्मा से बात कर लेता हूं। आप मुझे सिखा दें। तो मूसा ने ठीक—ठीक यहूदियों की जो प्रार्थना है, वह सिखायी। बड़े प्रसन्न थे मूसा कि एक भटके हुए आदमी को रास्ते पर लाए।

और जब उस आदमी को छोड़ कर मूसा चले, तो जैसे ही एकांत आया, जोर से एक आवाज आकाश से गूँजी कि मूसा, मैंने तुझे भेजा था कि तू लोगों को मेरे पास लाना, तू तो लोगों को मुझसे दूर करने लगा। मेरा प्यारा, तूने उससे उसकी प्रार्थना छीन ली! शब्द नहीं सुने जाते हैं, भाव सुने जाते हैं। तू वापिस जा, क्षमा माँग! उससे प्रार्थना सीख! मूसा तो कांप गये। भागे— गये, उस गड़रिये को पकड़ा, उसके चरणों में गिरे और कहा—मुझे क्षमा कर दे, भाई! मैने जो कहा उसे वापिस लेता हूँ। परमात्मा की नजरों में तेरी प्रार्थना स्वीकार हो गयी है, हमारी प्रार्थना अभी स्वीकार नहीं हुई है। तू जैसा चाहे वैसा ही कर। और मुझे क्षमा कर दे। मुझसे बड़ी भूल हो गयी।
यह कहानी मधुर है, प्रीतिकर है, अनूठी है। सहज, स्वाभाविक, तब पूजा का अनुभव होता है। अभी तो तुम्हारी पूजा इतनी ओछी है!

संतो मगन भया मन मेरा–(प्रवचन–14)
वक्त की तलवार से कुछ फूल टूटे हैं
जरुर !
क्या पता यूँ टूट कर भी #गिरना उनका !
#लक न हो !!
पर अभी उम्मीद की शाखों से हैं !
लिपटे हुए !!
क्या पता तकदीर शायद अब भी उनके !
#हक में हो !!
बस उन्हीं को बीनकर ,मन्दिर में रख देती हूँ
मैं !
क्या पता वो भी उन्हीं की याद में !
मन्दिर में हो !!
हम भले हैं या बुरे ये खुद के #कान्टों पर न
तौल !
क्या पता कोई तराजू झुकती उसके !
#हक में हो !!
मन्दिरों की दौड़ में मन की गली !
सूनी हुई !
राम की मंजिल कहीं रैदास का !
छप्पर न हो !!
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श्री हरि !!

माँ का नम्बर .

बस अभी यादें मिटाने निकली थी ! थोड़े कागज जलाने निकली थी ! सोचा था बिना देखे सब जला दूंगी ! अच्छा हो या बुरा अतीत सारा मिटा दूंगी ! ज्यादा पुराना हो तो अतीत भी रद्दी हो जाता है !
बस यही सोचकर उस ढेर में तीली लगाने निकली थी ! मगर कुछ याद ऐसी होती हैं ! आप न चाहें तो भी आँख भिगोती हैं !
ढेर ऊँचा था आँख नीची थी ! धुएं के नाम पर कुछ ऐसे आँख मीचीं थी !
बड़े से ढेर में छोटा सा एक पुर्जा था ! वो कागज के वेश में हमारी जीवन ऊर्जा था ! लगा कि वो ही सारा #अम्बर था ! उसमें माँ का पुराना नम्बर था !
माँ अनपढ़ थी सो कभी फोन नहीं करती थी ! लेकिन बच्चों के फोन न कट जाएँ इस आस में बार बार कान से लगाकर देखा करती थी !
जमाना जानता है ! अब यहाँ नहीं है #माँ !
मैं पता नहीं किस आस में नम्बर मिलाने निकली थी !
हर बार कम्प्यूटर की आवाज यही कहती ! #माँ अब इस नम्बर पर नहीं रहती !
जरा सी बात यूँ बढ़ जाएगी मालूम न था !
#ज्ञान की गंगा में जमुना उमड़ आएगी ,मालूम न था !
बस इसी भूल को दिल से मिटाने निकली थी !
थोड़े कागज जलाने निकली थी !
थोड़े कागज जलाने निकली थी !
दिल से !!!!!!!!माँ !!!!!!!!