विकल्प बहुत मिलेंगे, मार्ग भटकाने के लिए। संकल्प एक ही रखना, मंजिल
तक जाने के लिए। अंबाला शहर की युवती वानी गोयल ने मंजिल पाने के लिए देसी
गाय का सहारा लिया। जिस गाय को लोग सड़कों पर धक्के खाने के लिए छोड़ रही
हैं, अब वानी उसी के गोबर से मंदिर और हर घर में प्रभु के नाम की जलने वाली
ज्योत को तैयार कर रही है। उसने इसे नाम दिया है मंगलकारी ज्योत। यह ज्योत
वह राजस्थान, दिल्ली, बेंगलुरू तक पहुंचा चुकी है।
इस ज्योत की खास बात यह है कि इससे घर की बीमारियों को भी दूर किया जा सकता है। क्योंकि इस ज्योत में न केवल गाय का गोबर बल्कि उस हवन सामग्री को भी मिलाया जाता है जोकि निरोग रहने के लिए आयुर्वेद में इस्तेमाल होती है। वानी का कहना है कि गोवंश को हम नहीं पालते बल्कि गोवंश हमें पालता है।
अंबाला शहर के जैन बाजार में रहने वाली 35 वर्षीय वानी गोयल को सात साल पहले वृदांवन में स्वामी राजेंद्र दास महाराज से देसी गोवंश को बचाने और बढ़ाने की प्रेरणा मिली। इसके बाद इन्होंने अपने घर के आसपास आने वाली बीमार व घायल गायों की सेवा करनी शुरू कर दी। गीताप्रेस गोरखपुर गोअंश से देखकर यह गायों का इलाज करने के साथ साथ ही साथ पेट दर्द और बुखार आदि होने पर उन्हें मानव के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा देकर उनका इलाज करती है।
वर्ष 2017 में आया गाय के गोबर से ज्योत बनाने का आइडिया
वानी ने बताया कि वह अकसर सोचती थी कि गोमूत्र के साथ गोबर का इस्तेमाल इस तरह से हो कि उससे कमाई की जा सके। वर्ष 2017 में उनके मन में आया कि गाय के गोबर से ज्योत तैयार की जाए। इसके लिए उसने लोबान, देसी घी, अजवायन, गिलोय, गुगल, कपास इत्यादि गोबर में मिलाया और हाथ से ही ज्योत तैयार कर दी। इसके बाद इसका घर में ही इस्तेमाल कर देखा। सफलता मिलने पर उसने स्थानीय दुकानदारों को सैंपल दिए। हालांकि अभी यह काफी कम मात्रा में तैयार हो रहे हैं, लेकिन इसकी खपत शुरू हो गई है।
राख से फिल्टर कर रही पानी
वानी का कहना है कि गाय के गोबर से बनाए गए उपलों को जलाने के बाद जो राख बनती है, उससे पानी फिल्टर किया जाता है। जैन समुदाय ऐसे ही पानी पीता है। उन्होंने कहा कि गाय के गोबर की राख के पानी से फिल्टर किए गए पानी को बेशक लैब में चेक करा लिए जाए, राख वाला पानी आरओ से स्वच्छ होगा।
उन्होंने कहा कि वह जिस गाय को पाल रही है, वह खुद उनके दर चलकर आई थी। रोजाना आ जाती और घर में घुसने लगती। इसके बाद उन्होंने उसे अपने घर ही रख लिया। बाद में उसे लेने बहुत आए लेकिन वानी ने नहीं दिया। अब वह गोमूत्र से अर्क तैयार करने की विधि इजाद कर रही है।
त्योहार पर पूजा और आम दिनों में लाठी
वानी ने कहा कि गोपाष्टमी पर हम गायों को ढूंढते फिरते हैं। इतना ही नहीं सांझी के समय घर में गोबर लाते हैं। यही हालत दशहरे और गोवर्धन पूजा के दिन होता है, लेकिन बाकि दिनों में गाय को लाठी मारते हैं।
इस ज्योत की खास बात यह है कि इससे घर की बीमारियों को भी दूर किया जा सकता है। क्योंकि इस ज्योत में न केवल गाय का गोबर बल्कि उस हवन सामग्री को भी मिलाया जाता है जोकि निरोग रहने के लिए आयुर्वेद में इस्तेमाल होती है। वानी का कहना है कि गोवंश को हम नहीं पालते बल्कि गोवंश हमें पालता है।
अंबाला शहर के जैन बाजार में रहने वाली 35 वर्षीय वानी गोयल को सात साल पहले वृदांवन में स्वामी राजेंद्र दास महाराज से देसी गोवंश को बचाने और बढ़ाने की प्रेरणा मिली। इसके बाद इन्होंने अपने घर के आसपास आने वाली बीमार व घायल गायों की सेवा करनी शुरू कर दी। गीताप्रेस गोरखपुर गोअंश से देखकर यह गायों का इलाज करने के साथ साथ ही साथ पेट दर्द और बुखार आदि होने पर उन्हें मानव के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा देकर उनका इलाज करती है।
वर्ष 2017 में आया गाय के गोबर से ज्योत बनाने का आइडिया
वानी ने बताया कि वह अकसर सोचती थी कि गोमूत्र के साथ गोबर का इस्तेमाल इस तरह से हो कि उससे कमाई की जा सके। वर्ष 2017 में उनके मन में आया कि गाय के गोबर से ज्योत तैयार की जाए। इसके लिए उसने लोबान, देसी घी, अजवायन, गिलोय, गुगल, कपास इत्यादि गोबर में मिलाया और हाथ से ही ज्योत तैयार कर दी। इसके बाद इसका घर में ही इस्तेमाल कर देखा। सफलता मिलने पर उसने स्थानीय दुकानदारों को सैंपल दिए। हालांकि अभी यह काफी कम मात्रा में तैयार हो रहे हैं, लेकिन इसकी खपत शुरू हो गई है।
राख से फिल्टर कर रही पानी
वानी का कहना है कि गाय के गोबर से बनाए गए उपलों को जलाने के बाद जो राख बनती है, उससे पानी फिल्टर किया जाता है। जैन समुदाय ऐसे ही पानी पीता है। उन्होंने कहा कि गाय के गोबर की राख के पानी से फिल्टर किए गए पानी को बेशक लैब में चेक करा लिए जाए, राख वाला पानी आरओ से स्वच्छ होगा।
उन्होंने कहा कि वह जिस गाय को पाल रही है, वह खुद उनके दर चलकर आई थी। रोजाना आ जाती और घर में घुसने लगती। इसके बाद उन्होंने उसे अपने घर ही रख लिया। बाद में उसे लेने बहुत आए लेकिन वानी ने नहीं दिया। अब वह गोमूत्र से अर्क तैयार करने की विधि इजाद कर रही है।
त्योहार पर पूजा और आम दिनों में लाठी
वानी ने कहा कि गोपाष्टमी पर हम गायों को ढूंढते फिरते हैं। इतना ही नहीं सांझी के समय घर में गोबर लाते हैं। यही हालत दशहरे और गोवर्धन पूजा के दिन होता है, लेकिन बाकि दिनों में गाय को लाठी मारते हैं।
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