Sunday, October 1, 2017

बीती ताहिं बिसार दे .....................
आज के समय में बहुत ही भ्रम उत्पन्न हो गया है ! यूँ तो हर क्षेत्र में भ्रम का बोलबाला है लेकिन भारतीय इतिहास को लेकर नित नये भ्रम उत्पन्न हो रहे हैं ! हर रोज नये खुलासे होते हैं और कल तक जिसे सच समझ कर नतमस्तक हो रहे थे आज वही सबसे बड़ा झूंठ बनकर सामने खड़ा हो रहा है ! ये रोज रहा है !आज गाँधी जयंती है चार पांच साल पहले तक खूब जोर शोर से गाँधी जयंती मनती थी लेकिन अब पता चला कि हमने गलत आदमी की जयंती मना दी ! वो तो इस लायक था ही नहीं कि हम से राष्ट्रवादियों से सम्मान पा सके !
इस बात से हमें एक कहानी याद आ गयी सोचा आपसे शेयर कर लें !!!
किसी गाँव में एक पति पत्नी रहते थे ! आपस में बड़ा प्रेम था ! प्रेम था अथवा अंडरस्टेंडिंग थी ये तो परमात्मा ही जाने लेकिन आज तक किसी ने उनके घर से झगड़े की आवाज न सुनी थी ! आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी न थी लेकिन फिर भी !!!!
हमारी सबसे बड़ी समस्या हमारे अपने दुःख नहीं बल्कि दूसरे की ख़ुशी होती है!
लोग परेशान थे कि झगड़ा क्यों नहीं हो रहा ! कभी तो हो कुछ तो हो !
बस इसी बात को लेकर एक ठलुए ने शर्त लगा ली कि मैं इनमे झगड़ा करवाकर रहूँगा चाहे जो करना पड़े ! बस उसने बहाने बहाने से उस घर के पुरुष से मित्रता कर ली !
वो अच्छा मित्र बनने का प्रदर्शन करता और इस तरह उसने उन पति पत्नी को पूरे विश्वास में कर लिया ! वो दोनों उसे अपने घर के सदस्य की तरह मानने लगे ! यहाँ तक कि वो पति की अनुपस्थिति में भी बिना रोक टोक उनके घर आने लगा !!!!!!
एक दिन उसने अवसर देख कर उस व्यक्ति की पत्नी से कहा तुम्हारे पति के शरीर में नमक ही नमक है ! ऐसे लोग मिठास का दिखावा करते हैं जरा आँखें खुली रखा करो ! पत्नी बोली लेकिन वो बहुत अच्छे हैं और उसने अपनी अंगुली मुंह में रखी और बोली थोडा बहुत नमक तो होता ही है शरीर में ! उस आदमी  ने कहा कि वो केवल नमक से बना है विश्वास न हो तो आज जब वो सो जाये तो तुम जीभ लगाकर देख लेना ! पत्नी ने उसे झिडक दिया ! लेकिन !!!!!!!
उधर शाम को जब वो आदमी पति से मिला तो उसने कहा !यार एक बात कहनी थी ,यदि बुरा न मानो तो !

पति बोला हाँ हाँ बोलो संकोच कैसा ! तुम घर के आदमी हो ! 
तो उस आदमी ने थोडा और संकोच का दिखावा करते हुए कहा छोड़ो यार तुम बुरा मान जाओगे ! लेकिन बात है गम्भीर !
तब तो पति को और ज्यादा उत्सुकता हुई ! उसने कहा तुम निश्चिन्त होकर कहो ! मैं बुरा नहीं मानूंगा !
उसने कहा ! भाभीजी हैं ना ,,
पति थोडा चौकन्ना हुआ ! हाँ हाँ क्या हुआ उन्हें !
तो उसने कहा ,वो इच्छाधारी नागिन हैं ! तुम जरा चौकन्ने होकर सोया करो ! कहीं किसी दिन डस न लें !
पति ने उसे तो झिडक दिया लेकिन मन में भ्रम का बीज पड़ गया !
अब रात में जब वो सोने के लिए गये तो वो रोज जैसे दिखने पर भी पहले वाले पति पत्नी न थे ! शंका ने उन्हें बदल दिया था ! उस दिन पति ने कोई बात न की और सोने का बहाना करके आँख मूंदकर लेट गया ! पत्नी भी उसके सोने की प्रतीक्षा करने लगी ! लेकिन पति को  दहशत के मारे नींद ही नहीं आ रही थी लेकिन फिर भी वो सोने का अभिनय करता रहा ! उधर जब पत्नी को पक्का विश्वास हो गया कि पति गहरी नींद में है तो वो चुपके से घूमी और अपनी जीभ से जैसे ही पति के कंधे को चखना चाहा पति उठकर बैठ गया !!!!!!
अगले दिन पूरे गाँव ने उनके टूटते हुए घर का तमाशा देखा ! 
हम जीवित शत्रु का तो कुछ बिगाड़ नहीं पा रहे हैं लेकिन अपने देश की नींव खोद खोदकर ईंट की गुणवत्ता जाँच रहे हैं ! दुर्भाग्य का विषय है कि हम राष्ट्र वाद के नाम पर अपने पूर्वजों को गालियाँ दे रहे हैं ! 
गेहूं के साथ घुन पिसता  है ये बात आज फिर सत्य सिद्ध हुई जब गाँधी विरोध में हम हमारे वीर प्रधान मंत्री स्वर्गीय लालबहादुर शास्त्री जी को भी भुला बैठे हैं ! 
न मनाये गाँधी जी का जन्म दिन ! वैसे भी क्या फर्क पड़ेगा ! वो जब शरीर में थे तो इस माटी का कर्ज चुका रहे थे ! अब जहाँ होंगे वहां जन्मदिन मना रहे होंगे ! 
लेकिन 60 साल बाद कोई अपने ही वंशज पर ऊँगली उठाये और वो भी कही सुनी को आधार बनाकर ! 
शर्मका विषय है !
2 अक्तूबर हमारे लिए शुभ दिन है ! गाँधी न सही #लालबहादुर जी को तो मानते ही होंगे अभी भी !

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