वक्त की तलवार से कुछ फूल टूटे हैं
जरुर !
क्या पता यूँ टूट कर भी #गिरना उनका !
#लक न हो !!
पर अभी उम्मीद की शाखों से हैं !
लिपटे हुए !!
क्या पता तकदीर शायद अब भी उनके !
#हक में हो !!
बस उन्हीं को बीनकर ,मन्दिर में रख देती हूँ
मैं !
क्या पता वो भी उन्हीं की याद में !
मन्दिर में हो !!
हम भले हैं या बुरे ये खुद के #कान्टों पर न
तौल !
क्या पता कोई तराजू झुकती उसके !
#हक में हो !!
मन्दिरों की दौड़ में मन की गली !
सूनी हुई !
राम की मंजिल कहीं रैदास का !
छप्पर न हो !!
====================
श्री हरि !!
जरुर !
क्या पता यूँ टूट कर भी #गिरना उनका !
#लक न हो !!
पर अभी उम्मीद की शाखों से हैं !
लिपटे हुए !!
क्या पता तकदीर शायद अब भी उनके !
#हक में हो !!
बस उन्हीं को बीनकर ,मन्दिर में रख देती हूँ
मैं !
क्या पता वो भी उन्हीं की याद में !
मन्दिर में हो !!
हम भले हैं या बुरे ये खुद के #कान्टों पर न
तौल !
क्या पता कोई तराजू झुकती उसके !
#हक में हो !!
मन्दिरों की दौड़ में मन की गली !
सूनी हुई !
राम की मंजिल कहीं रैदास का !
छप्पर न हो !!
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श्री हरि !!
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