||ॐ ||
जय श्री कृष्णा
-----------------आज सुबह से बड़ी चहल पहल हो रही है | घर घर कन्यापूजन का उत्सव......सबको जल्दी ,पहले हमारे घर ,पहले हमारे घर ,क्योंकि नौ दिन भूखे
रहे हैं आज खूब अच्छे से पारायण करेंगे | कल रावण दहन और फिर दशहरा पूजन.......
सब खुश हैं लेकिन इस हृदय में बहुत ही ग्लानि उत्पन्न हो रही है .........
नवरात्र समाप्ति की ओर है ,और हमने इतना कीमती समय यूँ ही निकाल दिया |
बस गिनते रहे आज पांच शेष ,आज चार शेष | नवरात्र का समय मिला था दशानन
को कमजोर करने के लिए ताकि दसवे दिन सिर्फ दशानन बचे वो भी कमजोर और अकेला
तभी तो मुक्ति मिलेगी उसे भी और हमें भी ............
परम् ऐश्वर्यशाली भगवान को भी रावण को नष्ट करने के लिए योजना बनानी पड़ी.....
उसकी आसुरी शक्तियों को नष्ट किया ,उसकी शक्ति के स्रोत को सुखाया ,तब कहीं
जाकर दशानन वध संभव हुआ ..
दशानन वध के माध्यम से प्रभु हमें संदेश देना चाहते हैं कि इस मन रूपी दशानन से
जीतना इतना आसान नहीं है ,कुछ मदद मैं करता हूँ हनुमान रूपी गुरु को भेजकर कुछ प्रयास तुम करो ,नौ रात्रि अर्थात एक एक करके नौ इन्द्रियों पर विजय और जिसके
अंगरक्षक साथ ना हो उस राजा को हराना कौन बड़ी बात है | अकेला राजा कभी शासन
नही कर सकता | फिर दशानन की नगरी में विभीषन रूपी सत्य का शासन होगा |
जहाँ सत्य का शासन होता है वहां संत आगमन भी होता है |
संत जहाँ होते हैं वहां सत्संग भी होता है |
जब सत्संग होता है तो भक्ति आती है |
और जहाँ भक्ति होती है भगवान वहीं निवास करते हैं
दुःख की बात है कि प्रभु का ये संदेश समझने में बड़ा विलम्ब हो गया............
श्री हरि #जीवनअनुभवश्रीहरिप्रेरणासे
जय श्री कृष्णा
-----------------आज सुबह से बड़ी चहल पहल हो रही है | घर घर कन्यापूजन का उत्सव......सबको जल्दी ,पहले हमारे घर ,पहले हमारे घर ,क्योंकि नौ दिन भूखे
रहे हैं आज खूब अच्छे से पारायण करेंगे | कल रावण दहन और फिर दशहरा पूजन.......
सब खुश हैं लेकिन इस हृदय में बहुत ही ग्लानि उत्पन्न हो रही है .........
नवरात्र समाप्ति की ओर है ,और हमने इतना कीमती समय यूँ ही निकाल दिया |
बस गिनते रहे आज पांच शेष ,आज चार शेष | नवरात्र का समय मिला था दशानन
को कमजोर करने के लिए ताकि दसवे दिन सिर्फ दशानन बचे वो भी कमजोर और अकेला
तभी तो मुक्ति मिलेगी उसे भी और हमें भी ............
परम् ऐश्वर्यशाली भगवान को भी रावण को नष्ट करने के लिए योजना बनानी पड़ी.....
उसकी आसुरी शक्तियों को नष्ट किया ,उसकी शक्ति के स्रोत को सुखाया ,तब कहीं
जाकर दशानन वध संभव हुआ ..
दशानन वध के माध्यम से प्रभु हमें संदेश देना चाहते हैं कि इस मन रूपी दशानन से
जीतना इतना आसान नहीं है ,कुछ मदद मैं करता हूँ हनुमान रूपी गुरु को भेजकर कुछ प्रयास तुम करो ,नौ रात्रि अर्थात एक एक करके नौ इन्द्रियों पर विजय और जिसके
अंगरक्षक साथ ना हो उस राजा को हराना कौन बड़ी बात है | अकेला राजा कभी शासन
नही कर सकता | फिर दशानन की नगरी में विभीषन रूपी सत्य का शासन होगा |
जहाँ सत्य का शासन होता है वहां संत आगमन भी होता है |
संत जहाँ होते हैं वहां सत्संग भी होता है |
जब सत्संग होता है तो भक्ति आती है |
और जहाँ भक्ति होती है भगवान वहीं निवास करते हैं
दुःख की बात है कि प्रभु का ये संदेश समझने में बड़ा विलम्ब हो गया............
श्री हरि #जीवनअनुभवश्रीहरिप्रेरणासे
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