Savita GoyaltoShri Banke Bihari Temple, Vrindavan
||नारायण ||
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लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ |
हम चलेंगे साथ मैं पथ में खड़ा हूँ ||
जब जगत की भीड़ में तुम जा रहे थे
झील झरनों के तराने गा रहे थे
जब छुड़ाया हाथ मैं तब से खड़ा हूँ
लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ
तुम रहो उस पार ,ये तुमने चुना था
मेरा मन क्रन्दन कहाँ तुमने सुना था
तुम मेरी आवाज थे मैं चुप खड़ा हूँ
लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ
तुम जगत की रौशनी में खो गये हो
मेरे होकर भी पराये हो गये हो
कब कहोगे नाथ जंगल में पड़ा हूँ
लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ
कल हुई जो बात उसको आज छोडो
जग से नाता तोड़ अपने घर से जोड़ो
बांह फैलाए मैं जन्मों से खड़ा हूँ
लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ
#जीवनअनुभवश्रीहरिप्रेरणासे
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लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ |
हम चलेंगे साथ मैं पथ में खड़ा हूँ ||
जब जगत की भीड़ में तुम जा रहे थे
झील झरनों के तराने गा रहे थे
जब छुड़ाया हाथ मैं तब से खड़ा हूँ
लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ
तुम रहो उस पार ,ये तुमने चुना था
मेरा मन क्रन्दन कहाँ तुमने सुना था
तुम मेरी आवाज थे मैं चुप खड़ा हूँ
लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ
तुम जगत की रौशनी में खो गये हो
मेरे होकर भी पराये हो गये हो
कब कहोगे नाथ जंगल में पड़ा हूँ
लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ
कल हुई जो बात उसको आज छोडो
जग से नाता तोड़ अपने घर से जोड़ो
बांह फैलाए मैं जन्मों से खड़ा हूँ
लौट आओ तुम क्षितिज के पार मैं पथ में खड़ा हूँ
#जीवनअनुभवश्रीहरिप्रेरणासे

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