Thursday, March 17, 2016

||श्री हरि ||
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हे अनंत आकाश तुझको देखना है
हे अखिल ब्रह्मांड तुझको देखना है 
तू गगन की खिडकियों से झांकता है,
लोग कहते हैं गगन तेरा पता है
मुझसे मिलने का है कब अवकाश ,मुझको देखना है
तू जगत की आत्मा सब का पिता है
लोग कहते हैं तू सबको सुन रहा है
मुझसे हो कब बात मुझको देखना है
जब जगत की झील में मुझको धकेला
साथ की थी बात ,फिर छोड़ा अकेला
कब चलोगे साथ मुझको देखना है
रोज होती रात ,फिर होता सवेरा
चाँद सूरज की चमक फिर भी अँधेरा
तुझमें जो प्रकाश मुझको देखना है
हे अनंत आकाश तुझको देखना है
हे अखिल ब्रह्मांड तुझको देखना है
‪#‎जीवनअनुभवश्रीहरिप्रेरणासे‬

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