स्वयं से मिलना हो सकता है एक सुखद संयोग
पर तुमसे मिलना,कतई नहीं
यूँ तुम्हारा अंतस में समा जाना
अवश्य ही सुनिश्चित योजना रही होगी
उन आसमानों के फ़रिश्तों की
वरना कहाँ यूँ कोई आकर
ज़मीन के इंसा से मिला करता है
जीने का पवित्र पावन उद्देश्य सहसा ही मिल गया
बिखरा बिखरा सा जीवन,नीरस इक इक पल अव्यवस्थित
इक प्रेम-डोर में बँध सरस उल्लासित
मन पिघलने लगा, बूँद बूँद सिमटने लगा
बदल गई जमीं, बदल गया आसमान
बिना तुम्हारे बहुत अकेली हूँ
स्वयं में ही सिमटी रहती हूँ
जो कुछ दूर चलकर साथ छोड़ दे
उसके बिना चल पाना मुमकिन नहीं है
इंतज़ार ही उम्र भर का साथी बन गया है
मैं चल रही हूँ पर ये 'मन' ठहर गया है।
डॉ मंजु गुप्ता
पर तुमसे मिलना,कतई नहीं
यूँ तुम्हारा अंतस में समा जाना
अवश्य ही सुनिश्चित योजना रही होगी
उन आसमानों के फ़रिश्तों की
वरना कहाँ यूँ कोई आकर
ज़मीन के इंसा से मिला करता है
जीने का पवित्र पावन उद्देश्य सहसा ही मिल गया
बिखरा बिखरा सा जीवन,नीरस इक इक पल अव्यवस्थित
इक प्रेम-डोर में बँध सरस उल्लासित
मन पिघलने लगा, बूँद बूँद सिमटने लगा
बदल गई जमीं, बदल गया आसमान
बिना तुम्हारे बहुत अकेली हूँ
स्वयं में ही सिमटी रहती हूँ
जो कुछ दूर चलकर साथ छोड़ दे
उसके बिना चल पाना मुमकिन नहीं है
इंतज़ार ही उम्र भर का साथी बन गया है
मैं चल रही हूँ पर ये 'मन' ठहर गया है।
डॉ मंजु गुप्ता
No comments:
Post a Comment