Monday, March 13, 2017

भारतीय राजनीति तब और अब !

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अटल बिहारी वाजपेयी -भाजपा सरकार- .(प्रथम शासनकाल)
कार्यकाल
१६ मई १९९६ – १ जून १९९६
कुछ तुलनात्मक अध्ययन कल और आज में !
जैसी परिवर्तन की बयार आज चल रही है बहुत कुछ ऐसी ही 1991से 1996 के बीच इस देश में बह रही थी ! अयोध्या में #विवादित ढांचे को #बाबरीमस्जिद कहकर गिराया जा चुका था ! पूरे देश को ऐसा लग रहा था कि बस एक बार चुनाव हो जाएँ तो देश का सिंघासन भाजपा को सौंप कर रामराज्य लाया जाए | फिर इस देश को हिन्दू राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकेगा ! सारे देश में एक अनकहा सा आन्दोलन चल रहा था ! भाजपा जहाँ हिन्दुओ को उनके सुनहरे अतीत के लौट आने का स्वप्न दिखा रही थी वहीँ कुछ #जयचंद मुसलमानों को आगामी स्थिति के लिए भाजपा का भय दिखाकर जनसंख्या वृद्धि और इस्लामिक जिहाद के लिए उकसा रहे थे ! और इसी उठा-पटक के बीच देश में लोकतंत्र का पर्व आया ! सारे देश में उत्सव का सा माहौल था .कोई #रामराज्य के लिए उतावला था कोई #जिहाद के लिए ! जमकर वोटिंग हुई और भाजपा पूर्ण बहुमत से देश की सत्ता सम्भालने में सफल हुई ! लेकिन मात्र एक माह में ही #भितरघात का शिकार होकर सिंघासन गंवा बैठी | "बिल्ली के भागो छीका टूटा ''
सरकार की थाली बिखरी और कुछ लुप्त प्राय: से जीव जैसे एच .डी .देवगौड़ा ,चन्द्रशेखर ,इंद्रकुमार गुजराल जैसों को भी शाही थाली चखने का अवसर मिल गया
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(द्वितीय शासनकाल)
अटल बिहारी बाजपेयी -भाजपा सरकार !!
कार्यकाल
१९ मार्च १९९८ – २२ मई २००४
देश ने मध्यावधि चुनावों का सामना किया और मार्च 1998 में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त करते हुए फिर देश की बागडोर सम्भाली .
क्योकिं देश का हिन्दू यही चाहता था !
अटल सरकार ने ११ और १३ मई १९९८ को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया।
मतलब वर्तमान प्रधानमन्त्री #मोदी जी की तरह ही साहसी निर्णय लिए !
लेकिन एक गलती जो भाजपा को लम्बे वनवास की सजा के रूप में मिली ! वो थी तुष्टिकरण की नीति .
सरकारी खर्चे पर रोजा इफ़्तार शुरू किया-अटल सरकार ने लेकिन राम मंदिर में क़ानूनी अड़चन बताते रहे .
19 फ़रवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की ।अटल सरकार ने लेकिन धारा-370 में क़ानूनी अड़चन गिनाते रहे !
हज सब्सिडी बढ़ा दी स्कूलों में छात्रवृत्ति की आड़ में मुस्लिम बच्चों के लिए #वजीफे की व्यवस्था कर दी लेकिन समान नागरिक संहिता को अनदेखा करती रही !
और हिन्दू बेचारा ........अगले चुनाव के दिन गिनने लगा !
अगले चुनाव के दिन तो वो संपोले भी गिन रहे थे जिन्हें वाजपेयी सरकार हिन्दुओं के हिस्से का दूध पिला रही थी ! क्योंकि सांप दूध पीकर भी अपने विष की ही वृद्धि करता है ! जल्द ही वाजपेयी सरकार को इसका ट्रेलर मिला..
कुछ ही समय पश्चात् पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। अटल सरकार ने पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन न करने की अंतर्राष्ट्रीय सलाह का सम्मान करते हुए धैर्यपूर्वक किंतु ठोस कार्यवाही करके भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया।और देश के अनेक वीर योद्धा एक बच्चे की गलती से लगी इस आग में स्वाहा हो गये ! #मेरठ में आज भी जगह -जगह उन वीरों के स्मृतियों को आप देख सकते हैं |इस युद्ध में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण भारतीय सेना को जान माल का काफी नुकसान हुआ और पाकिस्तान के साथ शुरु किए गए संबंध सुधार एकबार फिर शून्य हो गए।
जैसे वर्तमान प्रधानमन्त्री माननीय #मोदी जी अपनी ओजस्वी भाषा से जनमानस को उद्देलित करते हैं वैसे ही माननीय #अटल जी भी करते थे !
उदाहरण देंखें ..............
"भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो।"
"क्रान्तिकारियों के साथ हमने न्याय नहीं किया, देशवासी महान क्रान्तिकारियों को भूल रहे हैं, आजादी के बाद अहिंसा के अतिरेक के कारण यह सब हुआ[9][10]।"
"मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय-संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है[11]।"
ये माननीय #अटल जी के शब्द हैं .
#मोदी जी को तो आप सुन ही रहे हैं .
और अंत में ...
मुझे तो इश्क में बर्बाद होना भाता है !
तू अपनी बात कर ,कब तक कलेजा मांगेगा .

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