||ॐ शांति ||
--------------
आज की सुबह कुछ झुलसा रही है ,
सुना है बसंती हवा जा रही है ||
कभी भोर में जो नमी सी घुली थी ,
सुना है उसे चांदनी खा रही है ||
चमन की वीरानी डराने लगी है ,
क्यूँ खिलने से पहले कली जल रही है ||
अभी तो चमन में भरी बोर हर सू ,
तो कोयल क्यूँ नगमें सुनाती नहीं है ||
कभी तो उठेंगे घने मेघ वन में ,
मयूरी क्यों नर्तन से घबरा रही है ||
ये शब्दों के शोले किसे ढूंढते हैं ,
मेरी लेखनी आग बरसा रही है ||
समय एक सफर है मुसाफिर हैं हम सब ,
ये ऋतुएं तो राहों में टकरा रही हैं ||
आज की सुबह कुछ झुलसा रही है
सुना है बसंती हवा जा रही है
श्री हरि
जय जय श्री राधे
--------------
आज की सुबह कुछ झुलसा रही है ,
सुना है बसंती हवा जा रही है ||
कभी भोर में जो नमी सी घुली थी ,
सुना है उसे चांदनी खा रही है ||
चमन की वीरानी डराने लगी है ,
क्यूँ खिलने से पहले कली जल रही है ||
अभी तो चमन में भरी बोर हर सू ,
तो कोयल क्यूँ नगमें सुनाती नहीं है ||
कभी तो उठेंगे घने मेघ वन में ,
मयूरी क्यों नर्तन से घबरा रही है ||
ये शब्दों के शोले किसे ढूंढते हैं ,
मेरी लेखनी आग बरसा रही है ||
समय एक सफर है मुसाफिर हैं हम सब ,
ये ऋतुएं तो राहों में टकरा रही हैं ||
आज की सुबह कुछ झुलसा रही है
सुना है बसंती हवा जा रही है
श्री हरि
जय जय श्री राधे